छत्तीसगढ़

पूर्व संसदीय सचिव विनोद चंद्राकर ने सड़कों पर बैठे मवेशियों से हो रहे हादसे पर सरकार को घेरा, कहा- साय सरकार की अदूरदर्शिता से सड़कों पर बेजुबानों का जमावड़ा, हर दिन हो रहे हादसे

महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव छग शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने कहा कि, छत्तीसगढ़ की, भाजपा सरकार गौ माता की, सुरक्षा के अपने वादे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने गौ माता की, रक्षा और आम राहगीरों की, सुरक्षित यात्रा के लिए पूरे प्रदेश में गोठान की, वैज्ञानिक व्यवस्था बनाई थी। इससे आवारा मवेशी सड़कों से हटे थे, दुर्घटनाएं रुकी थीं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली थी। लेकिन साय सरकार ने सत्ता में आते ही दुर्भावना पूर्वक इस पूरी व्यवस्था को बंद कर दिया। आज उसी अदूरदर्शी निर्णय का दुष्परिणाम हम महासमुंद सहित पूरे प्रदेश की, सड़कों पर देख रहे हैं।
श्री चंद्राकर ने कहा कि, आज हालात यह है कि, जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग 53, 353 सहित हर राज्य मार्ग और ग्रामीण सड़क पर पचास से सौ आवारा मवेशियों का झुंड दिन-रात बैठा रहता है। दिन में ये यातायात जाम का कारण बनते हैं और रात में तेज रफ्तार वाहनों के लिए मौत का कारण बन रहे हैं। इन बेजुबानों के साथ-साथ रोज हमारे निर्दोष नागरिक भी दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा रहे हैं। जो सरकार गाय के नाम पर वोट मांगती है, वह सड़क पर तड़प-तड़प कर मर रही गौ माता को बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि, सबसे दुर्भाग्यजनक है सरकार का अपनी जिम्मेदारी से भागना। सड़कों से मवेशी हटाने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था करने के बजाय सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सचिवों और शहरी क्षेत्रों में नगर पालिका पर इसका भार डाल दिया है। आधी रात को, छुट्टी के दिन, रविवार को भी अधिकारियों द्वारा सचिवों को फोन कर हाईवे से जानवर खदेड़ने का फरमान सुनाया जा रहा है। यह आदेश सचिवों की, जान के साथ खिलवाड़ है। रात के अंधेरे में जानवरों को खदेड़ते समय वे खुद तेज रफ्तार ट्रकों और बसों की, चपेट में आ सकते हैं। विभाग में हमारी बहनें भी सचिव के पद पर हैं, क्या सरकार उनसे उम्मीद करती है कि, वे आधी रात को हाईवे पर जाकर मवेशी भगाएंगी।
पूर्व संसदीय सचिव ने सवाल किया कि, क्या हाईवे प्राधिकरण, पुलिस और पशुपालन विभाग की, कोई जिम्मेदारी नहीं है, केवल सचिव ही दोषी है। और मान लीजिए सचिव ने अपनी जान पर खेलकर मवेशी को सड़क से हटा भी दिया तो उसे रखेगा कहां। उसके चारे-पानी की, व्यवस्था कौन करेगा। सरकार को यह अव्यवहारिक फरमानबाजी तुरंत बंद करनी चाहिए और जनहित में गोठान योजना को पुनः प्रारंभ कर हर ब्लॉक में बड़े कांजी हाउस की, व्यवस्था करनी चाहिए।

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