उड़ीसा सीमा से लगे गांव झिटकी में जल जीवन मिशन ने आसान की पानी की राह, 202 घरों में पहुंचा पानी और आसान हुई जिंदगी

महासमुंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की, 25 वर्षों की, सार्वजनिक सेवा यात्रा सेवा, सुशासन और जनकल्याण को केंद्र में रखकर देश के अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के संकल्प की, यात्रा रही है। इसी सोच को धरातल पर साकार करती हुई योजनाएं आज गांवों में लोगों के जीवन को आसान बना रही हैं। महासमुंद जिले के उड़ीसा सीमा से लगे आदिवासी बहुल ग्राम झिटकी में जल जीवन मिशन ने पानी की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान करते हुए ग्रामीणों के जीवन में ऐसा बदलाव लाया है, जिसे वे रोज अपनी आंखों से देख और महसूस कर रहे हैं। कभी दो हैंडपंप और दूर स्थित जोक नदी पानी का सहारा थे, आज उसी गांव के 202 घरों तक नल से पानी पहुंच रहा है।
विकासखंड बागबाहरा का ग्राम झिटकी छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर उड़ीसा सीमा से लगा हुआ गांव है। कुछ समय पहले तक गांव में पेयजल की व्यवस्था केवल दो हैंडपंपों पर निर्भर थी। गर्मी के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती थी। कई परिवारों को दूर स्थित जोक नदी से पानी लाना पड़ता था। पानी लाने की, जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा महिलाओं के कंधों पर था। घर के दूसरे जरूरी कामों के बीच पानी लाने में लगने वाला समय उनकी रोजमर्रा की, जिंदगी का हिस्सा बन चुका था। इसका असर बच्चों की, पढ़ाई, परिवार के साथ समय और अन्य घरेलू कार्यों पर भी पड़ता था।
झिटकी में जल जीवन मिशन के अंतर्गत एकल ग्राम योजना के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को मजबूत किया गया। 62.43 लाख रुपये की, लागत से तैयार योजना में 40 किलोलीटर क्षमता और 12 मीटर स्टेजिंग वाले उच्च स्तरीय जलागार का निर्माण किया गया। इसके साथ ही 3196 मीटर पाइपलाइन बिछाकर ग्रामीणों के घरों तक पेयजल पहुंचाने की, व्यवस्था की गई। 11 सितंबर 2026 का दिन ग्राम झिटकी के लिए विशेष बन गया। ग्राम की, सरपंच कौशल्या पटेल एवं सचिव कृष्ण चंद पटेल के प्रयासों से गांव में जल उत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी अवसर पर झिटकी को हर घर जल घोषित किया गया। ग्रामीणों ने इसे वर्षों से चली आ रही पानी की, समस्या से मिली राहत के उत्सव के रूप में मनाया। नल से पानी मिलने की, खुशी में श्रीमती मधुलिका दीवान एवं अन्य ग्रामीणों ने स्टैंड पोस्ट की, पूजा की।
ग्राम की, हितग्राही श्रीमती मधुलिका दीवान पुराने दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि, पहले पानी लाने के लिए काफी परेशानी होती थी। दूर से पानी लाना पड़ता था और इसमें काफी समय और मेहनत लगती थी। अब घर में नल से पानी मिलने लगा है। पानी के लिए बाहर जाने की, जरूरत कम हो गई है और रोजमर्रा के काम आसानी से पूरे हो रहे हैं। उनकी बातों में पानी मिलने की, सुविधा के साथ उस राहत की, खुशी भी साफ दिखाई देती है, जो घर के आंगन में नल से पानी पहुंचने के बाद उनके जीवन में आई है।
घरों के साथ ही स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और पंचायत भवन में भी नल से पानी की, व्यवस्था की, गई है। इससे बच्चों, महिलाओं और ग्रामीणों को सार्वजनिक संस्थानों में भी स्वच्छ पानी की सुविधा मिल रही है। स्कूल में पानी की, उपलब्धता से बच्चों के लिए हाथ धोना और स्वच्छता संबंधी गतिविधियां आसान हुई हैं। वहीं आंगनबाड़ी केंद्र में छोटे बच्चों की देखभाल तथा स्वच्छता संबंधी कार्यों में भी पानी की, उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। गांव में पेयजल की, गुणवत्ता पर नजर रखने और ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक करने के लिए 5 जल वाहिनियों की, नियुक्ति की, गई है। इनमें हीराबाई सेन, मधुलिका दीवान, सिया भाई दीवान, प्रियंका दीवान एवं सेवती सेन शामिल हैं। इनके माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण के साथ ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इस तरह झिटकी में केवल पानी पहुंचाने की, व्यवस्था ही नहीं बनी, बल्कि जल की, गुणवत्ता और सुरक्षित उपयोग की, जिम्मेदारी में भी ग्रामीणों की, भागीदारी सुनिश्चित हुई है। आज झिटकी में नल से निकलती पानी की, धार केवल पानी नहीं है। उसमें ग्रामीणों की, वर्षों की, परेशानी से मिली राहत, महिलाओं का बचा हुआ समय, बच्चों के लिए बेहतर स्वच्छता, परिवारों की, बढ़ी सुविधा और भविष्य की, नई उम्मीद दिखाई देती है। कभी जिन हाथों में पानी के बर्तन लेकर दूर जाने की, मजबूरी थी, आज उन्हीं घरों के आंगन में नल से पानी पहुंच रहा है।


