ढिंढ़ोरा24 खुलासा: महासमुंद में 25 करोड़ 30 लाख का धान घोटाला! चूहे, गाय और कीड़े बने ‘आरोपी’, रखरखाव का खर्च भी करोड़ों में, कांग्रेस ने उठाया सवाल कर रहे जांच की मांग

मनोहर सिंह राजपूत(एडिटर इन चीफ)
महासमुंद। में घान का एक बड़ा घोटाला सामने आया है? जहां जिले के 5 धान संग्रहण केंद्रों में रखे करीब 25 करोड़ 30 लाख रुपये मूल्य का धान गायब हो गया है। संग्रहण केंद्रों के प्रभारियों की माने तो यह धान गाय, चूहे, कीड़े-मकोड़े, दीमक और मौसम की मार का शिकार हो गया है। दरसल जिले के पांच धान संग्रहण केंद्रों से 81 हजार 620 क्विंटल धान के गायब होने का मामला सामने आया है। जिससे सरकार को लगभग 25 करोड़ 30 लाख का सीधा नुकसान हुआ है। यह घोटाला तब उजागर हुआ जब धान की खरीद के बाद राइस मिलरों द्वारा उठाव के पश्चात संग्रहण केंद्रों में बड़ी मात्रा में धान की कमी पाई गई। यह धान सत्र 2024-25 में खरीदे गए 110 लाख क्विंटल से अधिक धान का हिस्सा था।

बीते वर्ष जिले के 182 उपार्जन केंद्रों में 110 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी की गई थी। राइस मिलरों के धान उठाव के साथ साथ, 22 लाख 88 हजार 875 क्विंटल धान जिले के 5 संग्रहण केंद्रों महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली के संग्रहण केंद्रों में रखा गया था। जिसके निराकरण के बाद इन केंद्रों से 81620 क्विंटल धान गायब पाया गया। जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ।

रखरखाव पर खर्च के बाद भी करोड़ों का नुकसान
जिला विपणन विभाग के पूर्व अधिकारियों ने इन पांच संग्रहण केंद्रों में धान के रख-रखाव, कैप कवर, प्लास्टिक, भूसे और फर्टिलाइजर्स पर 2.5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की थी। इसके बावजूद, धान के उठाव के बाद 81,620 क्विंटल धान गायब मिला, जिसकी अनुमानित कीमत 25 करोड़ 30 लाख रुपये बताई जा रही है। धान का रख-रखाव करने वाले संग्रहण केंद्र प्रभारियों ने इस भारी मात्रा में धान की कमी के पीछे गाय, चूहे, कीड़े-पतंगे, दीमक और खराब मौसम को कारण बताया है। अधिकारियों के लिए यह जवाब गले नहीं उतर रहा है।

कांग्रेस का आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि, यह धान खरीदी में बड़े पैमाने पर कट, कमीशन और भ्रष्टाचार का परिणाम है। पार्टी ने इस 25 करोड़ रुपये के घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पूर्व प्रभारी प्रदेश महामंत्री कांग्रेस, अमरजीत चांवला ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
जांच के नाम पर खानापूर्ति
संग्रहण केंद्रों में इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी पाए जाने के बाद, अधिकारियों ने संग्रहण केंद्र प्रभारियों को नोटिस जारी कर आठ बिंदुओं पर जवाब मांगा है। हालांकि, सभी प्रभारियों के जवाब एक जैसे और मिलते-जुलते आ रहे हैं, जिनमें चूहे, गाय, कीड़े-पतंगे और मौसम को धान गायब होने का कारण बताया गया है। फिलहाल, अधिकारी इन जवाबों का परीक्षण कर रहे हैं और इसके बाद आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है। यह पूरा मामला शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। जिला विपणन अधिकारी आशुतोष कोसरिया ने बताया कि, सभी संग्रहण प्रभारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। 8 बिंदुओं में जवाब प्रस्तुत किया गया है, जिसका परीक्षण किया जा रहा है।




