छत्तीसगढ़

चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी

महासमुंद। भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से आगामी दिनों में वर्षा एवं तेज हवाएं चलने की, संभावना को देखते हुए उप संचालक कृषि एफ आर कश्यप ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। कृषि विभाग ने किसानों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने तथा तेज हवा, भारी वर्षा एवं बिजली चमकने के दौरान खेतों में काम करने से बचने की, सलाह दी है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि, धान, दलहन एवं तिलहन की, खड़ी फसलें यदि पकने की, अवस्था में हैं, तो मौसम की, स्थिति को देखते हुए आगामी दो से चार दिनों तक कटाई का कार्य स्थगित रखें। जिन किसानों ने फसल कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसलों को शीघ्र सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर रखें। फसलों को तिरपाल से ढंकते समय ध्यान रखें कि, उसमें वर्षा का पानी जमा न हो तथा फसल के नीचे नमी न रहने पाए। खेतों में अतिरिक्त वर्षा जल की, निकासी की, समुचित व्यवस्था करें। फसल की, कटाई, मड़ाई एवं सुखाई के लिए साफ और सूखे स्थानों की, व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करें। उतेरा फसल के रूप में तिवरा एवं अलसी की, बुवाई करने वाले किसान फिलहाल कुछ दिनों तक बुवाई स्थगित रखें। रबी फसलों की, बुवाई मौसम साफ होने के बाद नवंबर माह के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ करने की, सलाह दी गई है। किसानों को खेतों की, नियमित निगरानी करने तथा कीट एवं रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद उचित कीटनाशक एवं कवकनाशक का उपयोग करने की, सलाह दी गई है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की, है कि, गीली फसल को लंबे समय तक ढेर में बंद करके न रखें। उपज को साफ, हवादार एवं सुरक्षित स्थान पर रखें तथा अनाज को उपयुक्त नमी स्तर तक सुखाने के बाद ही भंडारित करें। बीज के लिए रखी गई फसल को अलग सुरक्षित रखें और उसे कीट-पतंगों से बचाने के साथ उसकी अंकुरण क्षमता बनाए रखने का ध्यान रखें। भंडारण स्थल की, छत, फर्श एवं जल निकासी की, व्यवस्था भी दुरुस्त रखें। वर्षा एवं तेज हवाओं की, संभावना को देखते हुए सब्जियों और उद्यानिकी फसलों में पककर तैयार उपज की शीघ्र कटाई कर बाजार भेजने की, व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। बागवानी फसलों में उर्वरकों का प्रयोग मौसम साफ होने के बाद करें। फूलगोभी, ब्रोकली, चुकंदर, खीरा एवं पछेती करेला जैसी रबी मौसम की, सब्जियों की, बुवाई अथवा रोपाई नवंबर माह के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ करें। लता वाली सब्जियों जैसे करेला, लौकी एवं अन्य कद्दूवर्गीय फसलों को तेज हवाओं से बचाने के लिए सहारे की, व्यवस्था करें। केले के जिन पौधों में फूल एवं फल आ चुके हैं, उन्हें बांस का सहारा देकर सुरक्षित रखें। ओलावृष्टि की, आशंका वाले क्षेत्रों में उपलब्धता के अनुसार ओलावृष्टिरोधी जाली का उपयोग करें। वर्षा के बाद पौधों की, पत्तियों पर धब्बे, तनों में सड़न एवं जड़ों से संबंधित समस्याओं की, नियमित जांच करें। रोग के लक्षण दिखाई देने पर सही पहचान के बाद ही नियंत्रण के उपाय अपनाएं। साथ ही खेतों में अतिरिक्त पानी की, निकासी सुनिश्चित करें। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि, आगामी दिनों में संभावित वर्षा को देखते हुए पशुओं को सूखे एवं सुरक्षित स्थान पर रखें। तेज हवा एवं आकाशीय बिजली की, संभावना के दौरान पशुओं को चराते समय पेड़ों के नीचे आश्रय न लें। पशुओं के लिए चारे एवं स्वच्छ पेयजल की, पर्याप्त व्यवस्था रखें तथा हरे चारे, सूखे चारे एवं पशु आहार को वर्षा से सुरक्षित स्थान पर भंडारित करें। पशुओं में अचानक सुस्ती, भूख में कमी, दस्त या सांस संबंधी लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

*फसल क्षति होने पर बीमा कंपनी या कृषि विभाग को दें सूचना*

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि, प्राकृतिक आपदा अथवा प्रतिकूल मौसम के कारण फसल को नुकसान होने पर बीमित किसान तत्काल संबंधित बीमा कंपनी या कृषि विभाग को सूचित करें। फसल क्षति की, तस्वीरें एवं संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें तथा फसल बीमा दावा प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन करें।
कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों से अपील की, है कि, वे मौसम विभाग की, चेतावनियों का पालन करें तथा फसलों, उद्यानिकी उपज एवं पशुधन की, सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें।

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