प्रधानमंत्री कौशल प्रशिक्षण से गरिमा और तासु ने संवारा अपना भविष्य

महासमुंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की, 25 वर्षों की, सार्वजनिक सेवा यात्रा में महिला सशक्तिकरण और बेटियों को अवसर देने की, भावना निरंतर केंद्र में रही है। बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा, कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं ने आज अनेक परिवारों की, बेटियों को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। इसी क्रम में महासमुंद जिले में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत जागरूकता और कौशल प्रशिक्षण से बेटियां हुनर सीखकर आत्मनिर्भरता की, ओर बढ़ रही हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित मिशन शक्ति महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब) के माध्यम से बेटियों और महिलाओं को विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं कौशल विकास के अवसरों की, जानकारी दी जा रही है। इसका सकारात्मक परिणाम वार्ड क्रमांक 30, नया रावण भाठा निवासी गरिमा बंसवार एवं वार्ड क्रमांक 26, कॉलेज रोड महासमुंद निवासी तासु सुराना के जीवन में देखने को मिला है।
गरिमा बताती हैं कि, वे अपने परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं बनना चाहती थीं और स्वयं कुछ करना चाहती थीं। इसी दौरान उनके मोहल्ले के आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित जागरूकता शिविर के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत मिलने वाले निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण की, जानकारी मिली। गरिमा ने बिना देर किए प्रशिक्षण के लिए पंजीयन कराया और तीन माह का सिलाई प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने हुनर को रोजगार का माध्यम बनाया और आज घर से ही कपड़ों की, सिलाई का कार्य कर रही हैं। उनके हुनर ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद की है।
इसी तरह वार्ड क्रमांक 26, कॉलेज रोड महासमुंद निवासी तासु सुराना ने भी कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दी है। तासु बताती हैं कि, उन्होंने कभी ब्यूटीशियन के रूप में काम करने के बारे में गंभीरता से नहीं सोचा था। वे यह विचार कर रही थीं कि, ऐसा कौन-सा काम किया जाए, जिससे परिवार को आर्थिक सहयोग मिल सके। इसी दौरान एक सहेली के माध्यम से उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग के मिशन शक्ति महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब) द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के बारे में जानकारी मिली। उन्हें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत निःशुल्क ब्यूटीशियन प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने प्रशिक्षण में सहभागिता की, और ब्यूटीशियन का हुनर सीखा।
प्रशिक्षण ने उनके पुराने शौक को रोजगार की, नई राह में बदल दिया। तासु ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने घर से ही ब्यूटीशियन का कार्य शुरू किया और प्रतिदिन लगभग 8 से 10 घंटे मेहनत कर अपनी आय का जरिया बनाया। उनके इस प्रयास से परिवार को आर्थिक तंगी से उबरने में मदद मिली। आज वे अपने हुनर के बल पर आत्मनिर्भर हैं और परिवार को भी आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही हैं। गरिमा एवं तासु ने योजना से अपने जीवन में हुए बदलाव के लिए शासन का धन्यवाद ज्ञापित किया है।



