धान खरीदी पर साय सरकार का फैसला किसानों के साथ अन्याय, मानिक साहू बोले—किसानों को उचित मूल्य दे सरकार

महासमुंद। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर साय कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णय पर जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मानिक साहू ने नाराजगी जताते हुए इसे किसानों के हितों की, अनदेखी करने वाला फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि, प्रदेश की, अर्थव्यवस्था की, रीढ़ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए, लेकिन सरकार लगातार तीसरे वर्ष भी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की, दर से धान खरीदी का निर्णय लेकर किसानों को निराश कर रही है। मानिक साहू ने कहा कि, पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में लगभग 380 रुपये प्रति क्विंटल की, वृद्धि की है। ऐसे में किसानों को बढ़ती लागत, खाद, बीज, कीटनाशक और कृषि कार्यों में होने वाले खर्च को देखते हुए बेहतर मूल्य मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की, कि, किसानों को कम से कम 3500 रुपये प्रति क्विंटल की, दर से धान का मूल्य दिया जाए, ताकि उन्हें खेती से उचित लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि, सरकार 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने और 27.50 लाख किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदने की, बात कर रही है, लेकिन केवल खरीदी का लक्ष्य और केंद्रों की, संख्या बढ़ाने से किसानों की, समस्याएं दूर नहीं होंगी। किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य देना भी सरकार की, जिम्मेदारी है।
एग्रीस्टेक पंजीयन और डिजिटल सर्वे पर उठाए सवाल
जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष ने एग्रीस्टेक पंजीयन को अनिवार्य किए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि, तकनीकी या अन्य कारणों से जिन किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है, उनके लिए सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। यदि पंजीयन के अभाव में कोई किसान धान बेचने से वंचित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? मानिक साहू ने डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) के माध्यम से रकबा निर्धारण की, प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि, खसरा नंबर और कृषि रकबे में त्रुटियों की, शिकायतें किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। यदि समय रहते इन विसंगतियों को दूर नहीं किया गया, तो किसानों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ेंगे और खरीदी अवधि समाप्त होने तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा।उन्होंने कहा कि, सरकार को धान खरीदी शुरू होने से पहले सर्वे की, त्रुटियों को सुधारने, पंजीयन से वंचित किसानों को अवसर देने और शिकायतों के त्वरित निराकरण की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए।मानिक साहू ने राज्य सरकार से मांग की, कि, धान खरीदी के निर्णय पर पुनर्विचार कर किसानों को उचित मूल्य दिया जाए तथा तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण किसी भी पात्र किसान को अपनी उपज बेचने से वंचित न किया जाए। उन्होंने कहा कि, किसानों के हितों की, रक्षा केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर प्रभावी व्यवस्था लागू करने से होगी।



