तेन्दूपत्ता संग्रहण से 81,539 संग्राहक परिवारों को 41.52 करोड़ से अधिक का पारिश्रमिक, महिला संग्राहक परिवारों को 92,058 चरणपादुकाओं का वितरण

महासमुंद वनवासी अंचलों में रहने वाले परिवारों की मेहनत को सम्मान और उनकी आजीविका को मजबूत आधार देना जनकल्याणकारी शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 25 वर्षों की, सार्वजनिक सेवा यात्रा में जनसेवा, अंतिम व्यक्ति तक शासन की, पहुंच और नागरिक-केंद्रित विकास की, भावना को प्रमुखता मिली है। इसी सेवा भावना को राज्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वनवासी परिवारों की, आजीविका और कल्याण से जुड़े प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। महासमुन्द जिले में तेन्दूपत्ता संग्रहण से जुड़े हजारों परिवारों को उनके श्रम का समय पर पारिश्रमिक मिलना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
जिला वनोपज सहकारी संघ मर्यादित, महासमुन्द के माध्यम से तेन्दूपत्ता संग्राहकों को संग्रहण के एवज में पारिश्रमिक के साथ-साथ प्रोत्साहन राशि तथा महिला सदस्यों के लिए चरणपादुका वितरण जैसी सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है। इससे वनवासी परिवारों की आय को सहारा मिलने के साथ उनके जीवन में सुविधा और सम्मान भी जुड़ रहा है। तेन्दूपत्ता संग्रहण सीजन 2026 में महासमुन्द जिले में 786 फड़ों से 81 हजार 539 संग्राहक परिवारों के माध्यम से कुल 75 हजार 499 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया गया। सभी संग्राहक परिवारों को 41 करोड़ 52 लाख 44 हजार 582 रुपए की, संपूर्ण राशि का भुगतान डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में किया जा चुका है। तेन्दूपत्ता संग्रहण सीजन 2023 के अंतर्गत पात्र संग्राहक परिवारों को प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) का लाभ भी दिया गया। इसके तहत 76 हजार 650 संग्राहक परिवारों के लिए कुल 12 करोड़ 40 लाख 95 हजार 896 की, राशि वितरण योग्य थी। 30 सितंबर 2026 की स्थिति में बोनस की, राशि का भी शत-प्रतिशत भुगतान पूर्ण कर लिया गया है, जिससे तेन्दूपत्ता संग्रहण से जुड़े परिवारों को उनकी मेहनत का अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ।
वनवासी परिवारों की, महिलाओं की, सुविधा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए चरणपादुका वितरण भी की गई। संग्रहण वर्ष 2023-24 के अंतर्गत पात्र तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला सदस्यों के लिए 92 हजार 58 चरणपादुकाओं की, आवश्यकता के विरुद्ध जिला यूनियन महासमुन्द को प्राप्त सभी चरणपादुकाओं का वितरण पूर्ण किया जा चुका है।



