Inside Story: महासमुंद के वैद्य फूड में जब्त 200kg पनीर का सेंपल फेल, फर्म किया गया सील, कलेक्टर विनय कुमार के सख्त निर्देश पर तहसीलदार ने आधी रात मारा था छापा, खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, जब्त पनीर किया गया नष्ट

महासमुंद। महासमुंद जिला मुख्यालय से लगे भलेसर स्थित वैद्य फूड में जब्त 200kg पनीर का सेंपल फेल पाया गया है। सैंपल फेल होने के बाद अब फर्म में बनाए जा रहे पनीर और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाइयों पर भी सवाल खड़ा होने लगा है। फिलहाल जब्त पनीर को नष्ट करते हुए फर्म को सील कर दिया गया है। दरसल छत्तीसगढ़ में एनॉलॉग पनीर के प्रतिबंध के बाद भी, महासमुंद जिले में बिक रहे नकली पनीर को लेकर, कलेक्टर विनय लंगेह को 17 अगस्त की रात शिकायत मिली थी। शिकायत को कलेक्टर विनय कुमार ने गंभीरता से लिया। एनालॉग पनीर के निर्माण एवं विक्रय पर प्रतिबंध के उल्लंघन की आशंका को देखते हुए, सूचना पर कलेक्टर ने महासमुंद के भलेसर रोड स्थित वैद्य फूड में राजस्व विभाग की टीम को आधी रात छापा मार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निर्देश के बाद तहसीलदार जुगल किशोर ने कार्रवाई को लीड करते हुए पुलिस विभाग व अपनी टीम के साथ फर्म में दबिश दी। साथ ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों को भी तलब किया। संयुक्त टीम ने एक साथ वैद्य फूड में देर रात दबिश दी। एसडीएम अक्षा गुप्ता के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई के दौरान, लगभग तीन घंटे तक संस्थान की जांच की गई। रात करीब 12 बजे तहसीलदार जुगल किशोर, नायब तहसीलदार हरीश ध्रुव, खाद्य सुरक्षा अधिकारी शंखनाद भोई ने जांच शुरू की। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी उमेश वर्मा नदारद रहे। एसडीएम के मार्गदर्शन में तहसीलदार जुलग किशोर ने टीम को लीड किया। जांच के दौरान आधी रात पनीर का निर्माण किए जाने की स्थिति सामने आई। मौके पर उपलब्ध पनीर की गुणवत्ता और निर्माण में प्रयुक्त सामग्री को लेकर संदेह उत्पन्न होने पर, लगभग 200 किलोग्राम पनीर को जब्त किया गया। जब्त पनीर को कोल्ड स्टोरेज में रखा गया। दूसरे दिन सुबह कार्रवाई के दौरान विभाग द्वारा सील किए गए कोल्ड स्टोरेज में रखी खाद्य सामग्री को नियमानुसार खोलकर उसकी जांच की गई। खाद्य सामग्री की पुष्टि एवं गुणवत्ता परीक्षण के लिए पनीर का नमूना लिया गया, जिसे जांच हेतु राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, रायपुर भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट अब सामने आ गई है। जांच में नमूना असुरक्षित पाया गया है। नमूना असुरक्षित पाए जाने के बाद आज संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए जब्त पनीर को नष्ट कर दिया है, साथ ही आगे की कार्रवाई के लिए वैद्य फूड्स को सील भी कर दिया गया है।
*कार्रवाई की सूचना न हो लीक, इसलिए तहसीलदार की टीम ने फर्म के बाहर पहुंचकर किया खाद्य सुरक्षा विभाग को तलब*
जानकारी के अनुसार, जिले में एक्सपायरी और अमानक सामग्रियों की बिक्री की शिकायत के बाद जानकारी लीक हो जाती थी। नतीजा कार्रवाई के नाम पर विभाग कई बार, हाथ हिलाते नजर आया है। यही नहीं शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता भी उजागर हुई है। इसकी शिकायत भी कलेक्टर विनय कुमार से कई बार हुई, इसे देखते हुए इस छापा मारा कार्रवाई की जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों से पूरी तरह गोपनीय रखा गया। कलेक्टर के निर्देश के बाद राजस्व विभाग के टीम ने वैद्य फूड्स के बाहर पहुंचकर, खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए तलब किया, ताकि इसकी जानकारी लीक न हो और संचालक को रंगे हाथ पकड़ा जा सके। इस दौरान सूचना के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी शंखनाद भोई तत्काल कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचे, वहीं अभिहित अधिकारी उमेश वर्मा, आधी रात की इस कार्रवाई में नदारद दिखे? उनकी गैर मौजूदगी भी अधिकारियों की गैरजिम्मेदाराना रवैये पर सवाल खड़ा करता है?
फर्म के लाइसेंस कैटगरी और विभागीय जांच पर उठे सवाल, सोशल मीडिया में छिड़ी बहस
भलेसर स्थित वैद्य फूड्स में लिए गए नमूना असुरक्षित पाए जाने के बाद अब फर्म के लाइसेंस कैटगरी, पीनर निर्माण और विभागीय जांच पर सवाल उठने लगे है। इसे लेकर सोशल मीडिया में बहस छिड़ गई है और फर्म से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की बात की जा रही है। दरसल प्रदेश में एनॉलॉग पीनर पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद, यदि उक्त फर्म को एनॉलॉग पीनर निर्माण का लाइसेंस था तो वह लाइसेंस सस्पेंड किया जाना था। इसे लेकर अब फर्म से संबंधित जानकारी विभाग द्वारा सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है। कि आखिर विभाग द्वारा उक्त फर्म को लाइसेंस कब दिया गया था और किस कैटेगरी में दिया गया था? उक्त फर्म की जांच, निरीक्षण, कब-कब की गई थी? और वहां कितने बार सैंपलिंग और निरीक्षण की कार्रवाई हुई है? क्या इससे पहले वहां की सैंपलिंग की गई? हां तो रिपोर्ट क्या रहा? सेंपल नहीं लिया गया तो आखिर क्यों नहीं लिया गया? और इस तरह की अमानक पनीर आखिर पब्लिक को कब से खिलाया जा रहा था और विभाग क्यों कुम्भकर्णी नींद में सोया हुआ था? विभाग की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए अब संबंधित फर्म से जुड़ी तमाम जानकारी साझा करने की मांग की जा रही है।
नमूना असुरक्षित होने पर है जुर्माना और जेल का है प्रावधान
खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 के तहत जब्त नमूना के असुरक्षित पाए जाने के बाद अब फर्म के विरुद्ध न्यायालय में केश फाइल करने की कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर संचालक के खिलाफ जुर्माने और जेल की कार्रवाई भी हो सकती है। लेकिन यह विभाग की कार्रवाई की मजबूती पर आश्रित रहेगा।



