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एक जमीन-दो-दो मालिक, पिथौरा के शरीफाबाद में राजस्व रिकॉर्ड में ‘खेल’, किसानों की पुस्तैनी जमीन पर किसकी नजर!

मनोहर सिंह राजपूत(एडिटर इन चीफ)
​महासमुंद। राजस्व विभाग के दस्तावेजों में छेड़छाड़ और भू-माफियाओं व भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से सालों से खेती कर रहे किसानों की जमीन छीनने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला महासमुंद जिले के पिथौरा तहसील अंतर्गत पटवारी हल्का नम्बर 44 से सामने आया है। जहां के ग्राम सरिफाबाद के 8 भूमिस्वामी किसान, जो पूर्वजों के समय से करीब 23 एकड़ की जमीन पर खेती करते आ रहे थे, अब अपनी ही जमीन से वंचित हो गए है। क्योंकि भूमि स्वामी होने के बाद भी इन किसानों की जमीन पड़ोसी जिले बलौदाबाजार के सोनपुर के किसानों के नाम कर दिया गया है। अब ऐसे में जमीन के एक ही खसरे के दो-दो मालिक सामने आ गए है। बंदोबस्त के बाद पिथौरा तहसील अंतर्गत राजस्व विभाग के ऐसे कई कारनामें पूर्व के अधिकारियों की सांठगांठ में सामने आते रहे है। शरीफाबाद का यह मामला भी उसी एक बड़ी लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार का ही है। जहां शरीफाबाद के किसान अपनी ही उस जमीन के हक के लिए अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जिस पर उनके पूर्वज दशकों से खेती करते आ रहे थे। पटवारी हल्का नंबर 44 में हुए इस ‘जमीन घोटाले’ ने प्रशासन के पूर्व अधिकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिए हैं।

इस तरह से समझे ​क्या है पूरा मामला-
विवाद का केंद्र ग्राम शरीफाबाद के खसरा नंबर 312, 314, 316 समेत कुल 11 खसरों की 22.46 एकड़ भूमि यहां के 8 किसानों के पूर्वजों के नाम 1978-79 में आबंटित हुई। राजस्व अभिलेखों में बंदोबस्त के बाद इन किसानों को 1990-91 में मालिकाना हक भी प्रदान कर दिया गया। लेकिन अब इसी भूमि पर बलौदाबाजार जिले के पड़ोसी गांव सोनपुर के किसान भी बंदोबस्त के बाद अपना दावा ठोंक रहे है। इस भूमि पर अब दो पक्षों का अधिकार दिखाई दे रहा है।

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पहले पक्ष में छोटेटेमरी के मधु केंवट, अशोक यादव और अन्य किसानों का दावा यह कि, यह जमीन उनके पूर्वजों को शासन से मिली थी। वर्ष 1990-91 में उन्हें विधिवत भूमिस्वामी पट्टा भी जारी किया गया था। इसी आधार पर उन्होंने जनवरी 2026 में इस भूमि का विक्रय भी कर दिया है। जिसके दस्तावेज ढिंढोरा24 को उपलब्ध कराया गया है। वहीं​दूसरे पक्ष में ग्राम सोनपुर, बलौदाबाजार के किसान भी इन्हीं खसरा नंबरों पर अपना मालिकाना हक जताते रहे हैं।​मामले में नया मोड़ तब आया जब पड़ोसी जिले बलौदाबाजार के ग्राम सोनपुर के कुछ रसूखदार किसानों ने इस जमीन पर अपना दावा ठोक दिया। शरीफाबाद के किसानों का आरोप है कि, जिस जमीन पर उनके पूर्वज से समय से हक है उन्हें बल पूर्वक खाली कराया गया है। राजस्व दस्तावेजों में हुई इस संदिग्ध हेराफेरी दो जिलों के दो गांव के किसान आमने-सामने हो गए है।

​रसूख के दम पर बेदखली की कोशिश

शरीफाबाद ​के शिकायतकर्ता किसानों का आरोप है कि, भू-माफियाओं ने राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर दस्तावेजों में छेड़छाड़ की है। किसान तेजकुमार वैष्णव और परमानंद पटेल ने बताया कि,

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अब सोनपुर के रसूखदार किसान, शरीफाबाद के किसानों को डरा-धमका रहे हैं और उन्हें उनकी पुस्तैनी जमीन से बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं। ​”हम तीन पीढ़ियों से इस मिट्टी को सींच रहे हैं। हमारे पास 90 के दशक के सरकारी कागजात हैं, फिर हमारी जमीन रातों-रात किसी और की कैसे हो गई? यह सीधे तौर पर हमारी रोजी-रोटी छीनने की साजिश है।”

महासमुंद ​कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

​अपनी जमीन छिनते देख परेशान किसानों ने महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के पास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। किसानों ने ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि, पूर्व के ​राजस्व रिकॉर्ड की सूक्ष्म जांच कराई जाए। साथ ही ​दोषी अधिकारियों और भू-माफियाओं पर कठोर कार्रवाई हो ताकि ​किसानों का मालिकाना हक बहाल हो और वें फिर से अपना जीवन यापन कर सकें।

राजस्व अमले की चूक या बड़ी साजिश!

शरीफाबाद में ​एक ही जमीन पर दो अलग-अलग जिलों के किसानों का नाम दर्ज होना, राजस्व रिकॉर्ड की एक बड़ी विसंगति को दर्शाता है। मामला तब उजागर हुआ जब जमीन की रजिस्ट्री के बाद विवाद शुरू हुआ। दोनों ही पक्ष अब एक-दूसरे को फर्जी बताते हुए निष्पक्ष जांच की गुहार लगा रहे हैं।

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वहीं ​इस मामले में हल्का पटवारी राजेंद्र डोंगरे का कहना है कि, उनके पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार जमीन छोटेटेमरी यानी शरीफाबाद के किसानों के नाम पर ‘भूमिस्वामी’ हक में दर्ज है। उस समय के अधिकारियों ने कैसे उसे बलौदाबाजार के किसानों के नाम किया ये वे ही जानें, लेकिन अब बलौदाबाजार के किसानों का भी दावा इस गुत्थी को और उलझा रहा है।

​कलेक्टर ने जांच के लिए डिप्टी कलेक्टर को सौंपा कमान

​मामले की गंभीरता और सीमावर्ती जिलों के टकराव को देखते हुए महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया है। वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर तेजपाल सिंह अपने टीम के साथ मामले की सूक्ष्मता से जांच कर रहे हैं। मामले में दोनों पक्षों की शिकायत की बारीकियां जांची जा रही है।

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“शरीफाबाद की जमीन को लेकर सोनपुर और छोटेटेमरी के किसानों की शिकायत प्राप्त हुई है। इसके लिए एक जांच कमेटी गठित कर दी गई है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
— विनय कुमार लंगेह, कलेक्टर, महासमुंद

फिलहाल इस पूरे विवाद ने शरीफाबाद के ग्रामीण इलाकों में तनाव और चर्चा का माहौल पैदा कर दिया है। अब सभी की नजरें जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह साफ करेगी कि आखिर सरकारी कागजों में यह “दोहरी प्रविष्टि” मानवीय भूल थी या फिर करोड़ों की जमीन को ठिकाने लगाने की कोई बड़ी प्रशासनिक साजिश। ढिंढोरा24 के पास उपलब्ध जमीन के दस्तावेज कई सवाल भी खड़े करते हैं। जिसे हम परत दर परत सामने लाते रहेंगे।

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