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सुकमा में बदला फिजा: बंदूकों की गूँज की जगह अब विकास की गूँज, CM साय ने कहा- “भटके कदमों को मिली नई दिशा”

रायपुर। नक्सलवाद के दंश को झेलने वाले बस्तर के सुकमा जिले में अब शांति और विश्वास की नई इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार ‘बंदूक के बदले विकास’ और ‘हिंसा के बदले विश्वास’ की नीति पर मजबूती से आगे बढ़ रही है।

पुनर्वास से आत्मनिर्भरता का सफर

​मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्र में चल रही कौशल विकास गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने वहाँ प्रशिक्षण ले रहे पूर्व नक्सलियों और प्रभावितों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का असर जमीन पर दिखने लगा है। अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा को चुना है।

​”पुनर्वासितों की आँखों में चमकता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन मिले, तो भटका हुआ हर कदम सही दिशा पा सकता है। हमारी सरकार इन्हें केवल घर ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री

विकास के आँकड़े और उपलब्धियाँ

​सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रयासों को मुख्यमंत्री ने आँकड़ों के जरिए साझा किया:

  • प्रशिक्षण: वर्ष 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को विभिन्न ट्रेडों (राजमिस्त्री, सिलाई, कृषि) में प्रशिक्षित किया गया है।
  • वित्तीय सहायता: मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को ₹10,000 प्रति माह का स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
  • महिला सशक्तिकरण: 115 महिलाएँ तकनीकी प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
  • डिजिटल जुड़ाव: 107 हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए ताकि वे दुनिया से जुड़ सकें।

नियुक्ति पत्र और आवास की चाबियाँ: खुशियों की दस्तक

​कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पुनर्वासितों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी। उन्होंने:

  1. नियुक्ति पत्र वितरण: पुलिस विभाग में 20 और जिला प्रशासन में 95 लोगों को अनुकंपा नियुक्ति दी गई। मौसम संजना और भरत कुमार हेमला जैसे युवाओं को सरकारी नौकरी के पत्र सौंपे गए।
  2. आवास का उपहार: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 25 हितग्राहियों को उनके अपने घर की चाबियाँ सौंपी गईं।
  3. कॉफी टेबल बुक का विमोचन: मुख्यमंत्री ने ‘पुनर्वास से विकास तक’ नामक पुस्तक का विमोचन किया, जो बदलते सुकमा की सफलता की कहानियों को समेटे हुए है।

नई सुबह की आहट

​समारोह में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और सांसद महेश कश्यप की मौजूदगी ने प्रशासन के एकजुट प्रयासों को दर्शाया। पुनर्वास केंद्र के कला केंद्र में जब कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं, तो मुख्यमंत्री ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक भी है।

​आज का यह दौरा सुकमा के लिए महज एक प्रशासनिक दौरा नहीं था, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए एक नया सवेरा था जो दशकों से डर के साये में जी रहे थे। अब सुकमा की पहचान नक्सल गढ़ के रूप में नहीं, बल्कि ‘पुनर्वास और विकास’ के मॉडल के रूप में हो रही है।

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