छत्तीसगढ़

जरूरतमंदों को दी जाने वाली सहायता स्वेच्छानुदान महासमुंद में बन गया स्वजन सहायता मद : पंकज साहू

महासमुंद। नागरिक कल्याण समिति के संयोजक व पूर्व पार्षद पंकज साहू ने गरीब जरूरतमंत लोगों को सहायता प्रदान करने बनी स्वेच्छानुदान मद की, राशि का बंदरबांट का आरोप स्थानीय विधायक पर लगाया है। श्री साहू ने कहा कि विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा के संरक्षण में महासमुंद में स्वेच्छानुदान की, राशि का खुला बंदरबांट हुआ है। उन्होंने बताया कि, 28 मार्च 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक PLGMJ-2601/579/2026-GAD-I के तहत 101 हितग्राहियों को 30 लाख 30 हजार रुपये बांटे गए। कागज पर यह सहायता है, हकीकत में यह स्वजन- अनुदान है।
इस सूची को देखने के बाद गरीब, बीमार, विधवा और दिव्यांग कहीं नहीं दिखते। दिखते हैं भाजपा के पदाधिकारी, पार्षदों के परिजन, शासकीय कर्मचारियों के घर और विधायक के सबसे करीबी लोग। एक ही घर से दो-दो नाम, एक ही परिवार के कई सदस्य। कॉलेज रोड के सम्पन्न परिवार, राजनीतिक पहुंच वाले लोग, और तो और विधायक कार्यालय के ड्राइवर का वेतन भी उसकी माँ और बहन के नाम से स्वेच्छानुदान में पास कर दिया गया। शर्म की हद यह है कि, नाम जुड़वाने के बदले आधी राशि वापस मांगने की, भी चर्चा है। पहले 150 ठेले वालों के मामले में भी यही हुआ था। तब प्रशासन ने आंख बंद की, थी, अब फिर वही खेल दोहराया गया।
पूर्व पार्षद श्री साहू ने कहा कि, आदेश की प्रतिलिपि जिन 8 लोगों को भेजी गई है उनमें क्रमांक 5 पर स्वयं महासमुंद के विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा का नाम है। इसका मतलब साफ है। सूची बनने से लेकर स्वीकृति तक सब कुछ विधायक कार्यालय की, जानकारी में हुआ। अगर गड़बड़ी दिखती तो आपत्ति दर्ज कराते, लेकिन चुप्पी साध ली गई। भाजपा सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है। महासमुंद का यह उदाहरण उस दावे का मजाक है। सरकारी खजाना तब लूटा जाता है जब विधायक अपने पद का उपयोग कर अपने रिश्तेदारों, अपने ड्राइवर, अपने संबंधियों, अपने करीबी लोगों और संभ्रांत भाजपा नेताओं के परिवारों को लाभ पहुंचाए। यह पैसा उस मरीज का था जो अस्पताल में तड़प रहा है। उस विधवा का था जिसके घर चूल्हा नहीं जल रहा। उस दिव्यांग का था जो व्हीलचेयर मांग रहा है। उनका हक छीनकर अपनों में बांट दिया गया।
पंकज ने कहा कि, अगर विधायक अपने लोगों के लिए स्वेच्छानुदान दिला सकता है, तो महासमुंद की, हर जनता को भी स्वेच्छानुदान मांगने का हक है। क्योंकि जनता ने ही उन्हें विधायक बनाकर विधानसभा भेजा है। जनता का पैसा जनता पर ही खर्च होना चाहिए, भाजपा के कार्यकर्ताओं पर नहीं। उन्होंने मांग की है कि, जिला प्रशासन तत्काल इस सूची का भौतिक सत्यापन करे, लोकायुक्त स्वतः संज्ञान ले और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। जब तक जांच नहीं होती, तब तक यह माना जाएगा कि, यह घोटाला विधायक की सहमति से हुआ है। अब महासमुंद की, जनता जवाब चाहती है।

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