रायपुर संभाग

ढिंढोरा24 की खबर का असर: शरीफाबाद जमीन हेरफेर मामले में प्रशासन सख्त, जांच दल ने किसानों को किया तलब, शुरू हुई दस्तावेजों की पड़ताल

मनोहर सिंह राजपूत(एडिटर इन चीफ)
​महासमुंद। जिले के पिथौरा तहसील अंतर्गत ग्राम शरीफाबाद (पटवारी हल्का नंबर 44) में राजस्व रिकॉर्ड में हुई बड़ी धांधली का मामला अब गरमा गया है। ढिंढोरा24 में खबर आने के बाद महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच दल ने आज सांकरा पहुँचकर मामले की जमीनी जांच और पूछताछ शुरू कर दी है।​राजस्व रिकॉर्ड में हुई इस कथित ‘हेराफेरी’ को सुलझाने के लिए प्रशासन के आला अधिकारी मैदान में उतर चुके हैं। डिप्टी कलेक्टर तेजपाल ध्रुव और प्रमोद कुमार की अगुवाई में जांच दल सांकरा पहुँचा। इस दौरान तहसीलदार ललित सिंह, आरआई मुकेश साहू और पटवारी राजेंद्र डोंगरे भी मौजूद है।

​किसानों के बयान दर्ज- जांच दल ने सोनपुर(बलौदाबाजार) और छोटेटेमरी-शरीफाबाद के उन किसानों को तलब किया है, जो एक ही जमीन (रकबा) पर अपना-अपना मालिकाना हक जता रहे हैं।

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​दस्तावेजों की हो रही स्क्रूटनी- आरआई कार्यालय में दोनों पक्षों के किसानों की भारी भीड़ जुटी हुई है। किसान अपने पूर्वजों के समय के रिकॉर्ड और कब्जे के प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं।
​क्या है।

पूरे विवाद में फंसा 23 एकड़ का पेंच

​यह मामला मुख्य रूप से 22.47 एकड़ (लगभग 23 एकड़) जमीन से जुड़ा है, जिस पर वर्तमान में दो अलग-अलग जिलों के किसान दावा कर रहे है। शरीफाबाद के 8 ऐसे भूमिस्वामी हैं, जो पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं। उनका आरोप है कि, रिकॉर्ड में हेरफेर कर उन्हें उनकी ही जमीन से बेदखल कर दिया गया है। वहीं ​सोनपुर(बलौदाबाजार) के किसानों के नाम भी राजस्व रिकॉर्ड में हुए बदलाव के बाद उसी खसरे पर दर्ज हो गया है। ​

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विवाद का मूल कारण- “एक ही खसरा नंबर के दो अलग-अलग मालिक” सामने आने से स्थिति तनावपूर्ण है। इसे बंदोबस्त के दौरान पूर्व अधिकारियों की कथित सांठगांठ और लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और पीड़ित किसानों का आरोप है कि, यह महज तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘जमीन घोटाला’ है। पिथौरा तहसील के राजस्व विभाग में पूर्व में भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ सांठगांठ कर रिकॉर्ड बदले गए। शरीफाबाद के किसान अब अपनी ही पुश्तैनी जमीन के लिए सरकारी कटघरे में खड़ा होने को मजबूर हैं।

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फिलहाल ​जांच दल द्वारा सभी पक्षों के बयान और दस्तावेजों के मिलान के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। प्रशासन की इस सक्रियता से छोटेटेमरी और शरीफाबाद के किसानों में न्याय की उम्मीद जगी है। अब देखना यह होगा कि, जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होती है और पीड़ित किसानों को उनका हक वापस मिलता है या नहीं।

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